Irregular Periods Causes And Symptoms

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Irregular Periods Causes And Symptoms

Irregular Periods Causes And Symptoms

हर महिला अपने जीवन में मां बनने का सुख पाना चाहती है। लेकिन कई कारणों से महिला इनफर्टिलिटी का शिकार हो रही है। अधिकांश महिलाएं अपने मासिक धर्म चक्र में होने वाले बदलाव पर ध्यान केंद्रति नहीं करती है। और गर्भाधारण के समय इन सभी समस्या का पता चलता है। तब हर महिला के मन में सवाल आता है कि इस स्थिति में गर्भवस्था हो सकती है या नहीं? 

ऐसी कई महिलाएं जिनके मासिक धर्म अनियमित और इससे ओवुलेशन भी अनियमित होते है। कुछ महिलाएं तो कभी-कभी ओवुलेट होती हैं कभी नहीं होती हैं। कुछ में कभी-कभी मासिक धर्म तो आता है, लेकिन ओवुलेट नहीं करती हैं। निसंतानता वाली लगभग आधी महिलाओं को यह विकार होता है जिसे “ओव्यूलेशन विकार” के रूप में जाना जाता है। आज हम बात करेंगे की कैसे अनियमित पीरियड्स इनफर्टिलिटी का कारण बनता हैं।

 क्या आपका मासिक चक्र अनियमित है?- Kya Apka Masik Chakra Aniyamit Hai

अगर आपका मासिक धर्म चक्र 21 से 35 दिन से लंबा है तो इसे अनियमित मासिक चक्र का नाम दिया जाता है। यानी अगर आपका मासिक धर्म चक्र महीने दर महीने बदलते है तो आपका मासिक धर्म अनियमित माना जाता है। 

निसंतानता की समस्या में 30 से 40 प्रतिशत तक मामलों में अनियमित या आसामान्य ओवुलेशन प्रमुख कारण होता है। अनियमित महावारी या असामान्य रक्तस्राव अक्सर यह दर्शाता है कि आप ओवुलेशन नहीं कर रहें है, इस स्थिति को चिकित्सा रुप से एनोव्युलेशन के रुप में माना जाता है। महिलाओं की अवधि अगर कम (15 दिन) या ज्यादा (2 महीने) हो और यह स्थिति हमेशा ही रहती है आपके साथ तो यह चिंता का विषय है।  


अनियमित पीरियड्स के लक्षण- Aniyamit Periods Ke Lakshan

कुछ मामलों में अनियमित पीरियड्स के लक्षण देखने को मिलते है। इन निम्नलिखित में अनियमित पीरियड्स के लक्षण शामिल हैं- 

  • असामान्य स्पॉटिंग: बहुत ही हल्का-हल्का रक्तस्राव होना।  
  • बहुत कम या ज्यादा रक्तस्राव होना
  • मनोदशा में बदलाव: इनमें आमतौर पर चिंता, अवसाद और घबराहट शामिल हैं।
  • वजन में बदलाव: वजन बढ़ना अक्सर हाइपोथायरायडिज्म के साथ मेल खाता है, जबकि वजन कम होना हाइपरथायरायडिज्म के साथ होता है।
  • असामान्य अवधि: अगर आपके चक्र 21 दिनों से कम या 36 दिनों से लंबे हैं, तो आपको ओवुलेशन की समस्या हो सकती है। आपके चक्र 21 से 36 दिनों की सामान्य सीमा के बीच आते हैं, लेकिन आपके चक्र की लंबाई एक महीने से दूसरे महीने में सामन्य से भिन्न होती है, तो ये भी ओवुलेशन संबंधी अक्षमता का संकेत होता है। 

अन्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • सिरदर्द
  • बहुत ज्यादा दर्दभरे क्रैम्प 
  • उल्टी या दस्त की समस्या होना
  • पीरियड्स मिस होना 
  • कब्ज की समस्या होना
  • भूख में कमी लगना
  • अधिक थकान लगना
Read more: Female Infertility treatment 

अनियमित पीरियड्स के कारण- Aniyamit Periods Ke Karan

कुछ मामलों में अनियमित पीरियड्स के लक्षण देखने को मिलते है। इन निम्नलिखित में अनियमित पीरियड्स के कारण शामिल हैं- 

  • पिट्यूरी ग्लैंड का कम हार्मोन रिलीज करना
  • ओवरी का कम मात्रा में एस्ट्रोजन पैदा करना
  • प्रोलैक्टिन का लेवल बढ़ना
  • शरीर में मेल हार्मोन बढ़ना
  • तनाव का स्तर
  • मधुमेह 
  • मोटापा 
  • अत्यधिक व्यायाम या कुछ दवाओं का सेवन 
  • वजन घटाना 

कभी-कभी जल्दी रजोनिवृत्ति होना भी एक कारण होता है कि जब मैच्योर होने के लिए अंडों की आपूर्ति जल्दी खत्म हो जाती है।

अनियमित पीरियड्स और प्रेग्नेंसी- Aniyamit Periods Aur Pregnancy

जिन महिलाओं को अनियमित पीरियड्स होते है उनको गर्भधारण करने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता है। क्योंकि अनियमित पीरियड्स होने के कारण ओवुलेशन का पता नहीं चलता है। लेकिन आप ओवुलेशन प्रेडिक्टर किट या फिर बेसल बॉडी टेम्परेचर से ओवुलेशन का समय जानकर आप अपने सबसे फर्टाइल समय को संयोग करने के लिए चुन सकती है। 

कुछ मामलों में बिना ओवुलेशन के मासिक धर्म जैसा रक्तस्राव होना संभव है। यह आमतौर पर तब होता है जब गर्भाशय असतर की मोटा हो जाता है। यह स्थिति एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन असंतुन होने के कारण होता है। अनियमित पीरियड्स के कई संभावित कारण हो सकते हैं जो गर्भधारण को प्रभावित कर सकते हैं।   

अनियमित पीरियड्स का इलाज- Aniyamit Periods Ka Ilaj

अगर आप ओवुलेशन नहीं कर पा रही है या फिर अनियमित पीरियड्स का सामना कर रही है तो अपने ओवुलेशन को ठीक कर सकती है। यहां तक की अनियमित पीरियड्स को ठीक करने के लिए फर्टिलिटी ट्रीटमेंट से आपको मदद मिलती सकती हैं।

  • आयुर्वेद की प्रचीन पद्धति पंचकर्म में वमन, विरेचन, उत्तरबस्ती, नस्य और रक्तमोक्षण थेरेपी शामिल है जिससे महिला के शरीर का शुद्धिकरण किया जाता है। इससे पद्धति से महिला इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट किया जाता है। 
  • आयुर्वेदिक औषधियों द्वारा गर्भाशय की सूजन, संक्रमण और अन्य अनियमिता को भी जड़ से खत्म किया जाता है। इससे आपके डाइट और लाइफस्टाइल में सुधार आता है जोकि अनियमित पीरियड्स, ओवेरियन सिस्ट या फिर अंडाशय की गांठ का मुख्य कारण होता है। 
  • इसके अलावा आयुर्वेद में उत्तर बस्ती थेरेपी (Uttar Basti Therapy) पंचकर्म की बढ़िया चिकित्सा  (ayurvedic doctor) विधि है। उत्तर बस्ती थेरेपी के जरिए ट्यूब में होने वाला ब्लॉकेज को खोला जाता है। उत्तर बस्ती में अपके योनी में औषधीय तेल और हर्बल को डाला जाता है। इस थेरेपी में कोई दर्द नहीं होता और नेचुरल तरीके से फैलोपियन ट्यूब को खोला जाता है।     

ऐसे में अगर आप गर्भधारण करने की कोशिश कर रही है तो आप आयुर्वेद इलाज अपना सकते है। इनफर्टिलिटी की समस्या में ज्यादातर लोगों के दिमाग में आईवीएफ आता है। लेकिन काफी लोग इस बात से अंजान है कि जिन समस्याओं का इलाज करने में एलोपैथी विफल हो जाता है। वहां आयुर्वेद की पंचकर्म चिकित्सा पद्धति काफी निसंतान महिलाओं के लिए वरदान बनकर साबित हो रही हैं। 

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