बच्चेदानी में गांठ (Uterine Fibroids) का आयुर्वेदिक इलाज: लक्षण, कारण और प्राकृतिक उपचार
आजकल बच्चेदानी में गांठ की समस्या लगभग 70% महिलाओं को प्रभावित कर रहा है। लेकिन ज्यादातर भारतीय महिलाएं इसे अनदेखा कर देती हैं। तेजी से बढ़ती इस समस्या के कारण महिलाओं के पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और उन्हें गर्भधारण में भी परेशानी होती है। इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से जानेंगे की फाइब्रॉइड क्या होते हैं? (uterine fibroids meaning in hindi) क्या होता है, बच्चेदानी में गांठ होने के लक्षण क्या हैं और बच्चेदानी में गांठ का घरेलू इलाज क्या होता है?
बच्चेदानी में गांठ (यूट्रस में गांठ) होने से क्या प्रॉब्लम होती हैं?
गर्भाशय की मांसपेशियों में बढ़ने वाला यह ट्यूमर आपके पेट के निचले हिस्से में दर्द का कारण बन सकता है। इसकी वजह से आपको बार बार पेशाब आ सकता है और जो महिलाएं माँ बनना चाहती हैं, उन्हें गर्भधारण में परेशानी हो सकती है। बच्चेदानी में गांठ (bachedani me ganth) होने पर ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि बिना सर्जरी यह ठीक नहीं हो पाएगा लेकिन यहाँ बच्चेदानी में गांठ का आयुर्वेदिक इलाज जानेंगे।
बच्चेदानी में गांठ (यूट्रस में गांठ) का घरेलु इलाज
त्रिफला: नियमित रूप से सुबह खाली पेट में त्रिफला का सेवन करने से uterine fibroids meaning in hindi के लक्षण कम होते हैं। क्या आपको पता है त्रिफला तीन फलों के मिश्रण से बनता है - आँवला, हरड़ और बहेड़ा। इसको हल्के गुनगुने पानी में मिलाकर लेने से शरीर के अंदर मौजूद विषाक्त बाहर आ जाते हैं।
कैस्टर ऑयल पैक (Castor oil pack): आयुर्वेद में अरंडी के तेल को बहुत ही असरदार औषधि के रूप में जाना जाता है। आप एक सूती कपडे को तेल में भिगोकर उसे अपने पेट के निचले हिस्से पर डालें। एक गर्म पानी की बोतल लेकर उसे भी अपने पेट पर करीब 30-40 मिनट के लिए डालें। ऐसा करने से बच्चेदानी में गांठ के आकार में कमी आती है।
अशोक छाल का काढ़ा: आयुर्वेद में अशोक की छाल का काढ़ा बनाकर पीना भी बहुत असरदार माना जाता है। जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है उन्हें यह काढ़ा जरूर पीना चाहिए जिससे ब्लड फ्लो सही रहता है। जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा पेट दर्द होता है या अनियमित पीरियड्स रहता है उनके लिए भी यह औषधि बहुत लाभदायक है।
हल्दी वाला दूध: हल्दी एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसमे करक्यूमिन नामक तत्व मौजूद होता है और यह सूजन को कम करता है। आप रोजाना रात में हल्के गुनगुने दूध में एक चुटकी हल्दी मिलाकर पीने से बच्चेदानी की गांठ ठीक हो सकता है।
अलसी का बीज (Flaxseed): बच्चेदानी में गांठ का एक कारण हॉर्मोन असंतुलन भी है, जो अलसी के सेवन से कम हो सकता है। आप अलसी पाउडर को पानी या दही के साथ ले सकते हैं, इससे आप बिना किसी सर्जरी बच्चेदानी में गांठ से राहत पा सकते हैं।
यह भी पढ़ें: PCOD treatment in Pune
बच्चेदानी में गांठ के लिए पंचकर्म
आयुर्वेद की पंचकर्म थेरेपी (panchakarma therapy) बच्चेदानी की गांठ के लिए बहुत असरदार माना जाता है। इसकी मदद से आप शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर दोषों को संतुलित करते हैं और शरीर की शुद्धि करते हैं। आप अगर किसी विशेषज्ञ की निगरानी में वमन, विरेचन और बस्ती करवाते हैं तो यह समस्या 3 महीने में ठीक हो सकता है और आप प्राकृतिक रूप से गर्भधारण कर सकते हैं।
बच्चेदानी में गांठ के अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
बच्चेदानी में गांठ का आयुर्वेदिक इलाज क्या है?
बच्चेदानी में गांठ के लिए आयुर्वेदिक इलाज सबसे अच्छा माना जाता है, इसके अंतर्गत आपको आयुर्वेदिक जड़ी बूटी, पंचकर्म थेरेपी और योग करने की सलाह दी जाती है।
बच्चेदानी में गांठ होने पर क्या परहेज करना चाहिए?
बच्चेदानी में गांठ होने पर आपको चीनी, जंक फ़ूड, प्रोसेस्ड फ़ूड, ज्यादा कैफीन, शराब, आदि से परहेज करना चाहिए। इससे सूजन बढ़ सकता है।
किस विटामिन की कमी से गांठ होती है?
बच्चेदानी में गांठ का मुख्य कारण विटामिन बी 9 या बी 12 की कमी है।
Read Other Related Blogs:
